श्री विमलनाथ भगवान की आरती
तेरहवें तीर्थंकर
- चिह्न शूकर
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि कम्पिला
- माता-पिता जयश्यामा · कृतवर्मा
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय विमलनाथ स्वामी, प्रभु जय विमलनाथ स्वामी।निर्मल कर दो मन मेरा, हे अंतरयामी॥
नगरी कम्पिल धन्य हुई प्रभु, जन्म लिया जिसमें।कृतवर्मा पितु, जयश्यामा माँ, हरषे सब मन में॥ॐ जय विमलनाथ स्वामी…
माघ सुदी चौथे को जन्मे, उस दिन तप धारा।शूकर चिह्न चरण में सोहे, कंचन-तन प्यारा॥ॐ जय विमलनाथ स्वामी…
माघ सुदी छठ केवल प्रगटा, लोकालोक लखा।दिव्यध्वनि ने भवि जीवों को, शिव का पंथ दिखा॥ॐ जय विमलनाथ स्वामी…
आषाढ़ वदी आठें को प्रभु ने, सब बंधन तोड़े।गिरि सम्मेदशिखर से स्वामी, शिव से नाते जोड़े॥ॐ जय विमलनाथ स्वामी…
विमल नाम है, विमल गुणों का, विमल तुम्हारा ज्ञान।विमल बनें हम तुमको ध्याकर, पाएँ पद निर्वाण॥ॐ जय विमलनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥