श्री वासुपूज्य भगवान की आरती
बारहवें तीर्थंकर
- चिह्न भैंसा
- वर्ण रक्त
- जन्मभूमि चंपापुरी
- माता-पिता जयावती · वसुपूज्य
- निर्वाण चंपापुरी (मंदारगिरि)
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी।पंचकल्याणक अधिपति स्वामी, तुम अंतरयामी॥
चंपापुर नगरी भी स्वामी, धन्य हुई तुमसे।जयावति वसुपूज्य तुम्हारे, मात-पिता हरषे॥ॐ जय वासुपूज्य स्वामी…
बालब्रह्मचारी बन स्वामी, महाव्रत को धारा।प्रथम बालयति जग ने स्वामी, तुमको स्वीकारा॥ॐ जय वासुपूज्य स्वामी…
गर्भ, जन्म, तप एवं स्वामी, केवलज्ञान लिया।चंपापुर में तुमने स्वामी, पद निर्वाण लिया॥ॐ जय वासुपूज्य स्वामी…
वासवगण से पूजित स्वामी, वासुपूज्य जिनवर।बारहवें तीर्थंकर स्वामी, है तुम नाम अमर॥ॐ जय वासुपूज्य स्वामी…
जो कोई तुमको सुमिरे प्रभु जी, सुख-सम्पति पावे।पूजन-वंदन करके स्वामी, वंदित हो जावे॥ॐ जय वासुपूज्य स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥