श्री अनंतनाथ भगवान की आरती
चौदहवें तीर्थंकर
- चिह्न सेही
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि अयोध्या
- माता-पिता जयश्यामा · सिंहसेन
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय अनंत स्वामी, प्रभु जय अनंत स्वामी।अनंत गुणों के धारी, तुम अंतरयामी॥
नगर अयोध्या जन्म लिया प्रभु, सिंहसेन-नंदन।मात जयश्यामा हरषाईं, तीन लोक वंदन॥ॐ जय अनंत स्वामी…
ज्येष्ठ वदी बारस को जन्मे, उस दिन व्रत लीना।सेही चिह्न चरण में सोहे, मोह-जाल छीना॥ॐ जय अनंत स्वामी…
चैत्र अमावस केवल प्रगटा, खिरी दिव्य वाणी।अनंत चतुष्टय के तुम स्वामी, जय जिन गुणखानी॥ॐ जय अनंत स्वामी…
उसी अमावस सम्मेदाचल पर, पाया शिव-धामा।सिद्ध हुए प्रभु लोक-शिखर पर, पूरण सब कामा॥ॐ जय अनंत स्वामी…
जो तुम ध्यावे, तुम-सा होवे, यह जिनमत-वाणी।दीप जला हम आरति गावें, हे अनंत ज्ञानी॥ॐ जय अनंत स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥