श्री धर्मनाथ भगवान की आरती
पंद्रहवें तीर्थंकर
- चिह्न वज्रदंड
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि रत्नपुरी
- माता-पिता सुव्रता · भानु
- निर्वाण सम्मेदशिखर
आरती कीजे प्रभु धर्मनाथ की, संकटमोचन जिननाथ की॥
माघ सुदी का दिन था उत्तम, सुव्रता घर जन्म लिया प्रभु।राजा भानु अति हरषाए, इन्द्रों ने रत्न बरसाए॥आरती कीजे प्रभु धर्मनाथ की…
युवावस्था में प्रभु आए, राज-काज में मन न लगाए।झूठा सब संसार समझकर, राज-त्याग के भाव जगाए॥आरती कीजे प्रभु धर्मनाथ की…
घोर तपस्या लीन थे स्वामी, भूख-प्यास की सुध नहीं जानी।पूरण शुक्ल पौष शुभ आई, कर्म काट प्रभु ज्ञान उपाई॥आरती कीजे प्रभु धर्मनाथ की…
॥ जय जिनेन्द्र ॥