श्री सुमतिनाथ भगवान की आरती
पाँचवें तीर्थंकर
- चिह्न चकवा
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि अयोध्या
- माता-पिता मंगला · मेघरथ
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी, प्रभु जय सुमतिनाथ स्वामी।सुमति-प्रदायक जिनवर, तुम अंतरयामी॥
मेघरथ नृप पिता तुम्हारे, माता मंगला रानी।नगर अयोध्या जन्म लिया प्रभु, हरषे सब प्राणी॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
चैत्र सुदी ग्यारस को जन्मे, त्रिभुवन हरषाया।सुरपति ने सुरगिरि पर प्रभु का, न्हवन रचाया॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
राज-विभव सब क्षण में त्यागा, संयम-पथ धारा।घाति-कर्म हर प्रभु ने पाया, ज्ञान अनंत अपारा॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
चकवा चिह्न चरण में सोहे, स्वर्ण-वरण काया।कुमति हटे, सुमति जग जावे, जिसने गुण गाया॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
गिरि सम्मेदशिखर से स्वामी, शिवपुर को पाया।जन्म-मरण का फेरा मेटा, निज-सुख प्रगटाया॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
मंगल दीप जलाकर स्वामी, आरति हम गावें।सुमति-सुधा बरसाओ हम पर, तुम-से बन जावें॥ॐ जय सुमतिनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥