श्री पद्मप्रभ भगवान की आरती
छठे तीर्थंकर
- चिह्न लाल कमल
- वर्ण रक्त
- जन्मभूमि कौशाम्बी
- माता-पिता सुसीमा · धरण
- निर्वाण सम्मेदशिखर
जय पद्मप्रभु देवा, स्वामी जय पद्मप्रभु देवा।तुम बिन कौन जगत में मेरा, पार करो खेवा॥
तुम हो अगम अगोचर स्वामी, हम हैं अज्ञानी।अपरम्पार तुम्हारी महिमा, काहू ना जानी॥जय पद्मप्रभु देवा…
विघ्न निवारो, संकट टारो, हम आए शरणा।कुमति हटा सुमति दीजो, कर जोड़ पड़े चरणा॥जय पद्मप्रभु देवा…
पाँव पड़े को पार लगाया, सुख-सम्पति दीना।श्रीपाल का कष्ट हटाकर, सुवर्ण तन कीना॥जय पद्मप्रभु देवा…
॥ जय जिनेन्द्र ॥