श्री सुपार्श्वनाथ भगवान की आरती
सातवें तीर्थंकर
- चिह्न स्वस्तिक
- वर्ण हरित
- जन्मभूमि वाराणसी
- माता-पिता पृथ्वीषेणा · सुप्रतिष्ठ
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय सुपार्श्व स्वामी, प्रभु जय सुपार्श्व स्वामी।मंगलमय जिनराजा, तुम शिवपथगामी॥
नगर बनारस जन्म लिया प्रभु, आनंद अति भारी।सुप्रतिष्ठ नृप पिता तुम्हारे, पृथ्वीषेणा महतारी॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
ज्येष्ठ सुदी बारस को जन्मे, उस दिन तप धारा।राज-पाट सब छोड़ चले प्रभु, जग लख निस्सारा॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
स्वस्तिक चिह्न चरण में सोहे, हरित-वरण काया।सुखकारी है नाम तुम्हारा, जो ध्याया, पाया॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
फागुन वदी छठ केवल प्रगटा, समवसरण राजे।दिव्यध्वनि खिरती प्रभुवर की, भव-बंधन भाजे॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
फागुन वदी सातें को स्वामी, सम्मेदाचल से।मुक्ति-रमा को वरा प्रभु ने, छूटे भव-जल से॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
दीप-थाल ले आरति गावें, हम सब नर-नारी।भवसागर से पार करो प्रभु, जय मंगलकारी॥ॐ जय सुपार्श्व स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥