श्री संभवनाथ भगवान की आरती
तीसरे तीर्थंकर
- चिह्न घोड़ा
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि श्रावस्ती
- माता-पिता सुषेणा · दृढ़राज
- निर्वाण सम्मेदशिखर
आरती सम्भवनाथ तुम्हारी, हम सब गावें महिमा तिहारी॥
चौदह वर्ष तपस्या ठानी, कर्मजयी तुम केवलज्ञानी।शीश झुकाते भक्त पुजारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
तुमने आतम-ज्योति प्रकटाई, कर्म-शत्रुओं पर जय पाई।संकटहारी शिव-भरतारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
राजपाट क्षण भर में छोड़ा, शिवपथ पर जीवन-रथ मोड़ा।तुम हो तीर्थंकर पदधारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
शरण तुम्हारी जो आता है, मनवांछित फल वह पाता है।तुम शरणागत को सुखकारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
संकटमोचन नाम तुम्हारा, जिसने मन से तुम्हें पुकारा।मिलीं सिद्धियाँ मंगलकारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
नाथ आरती यह स्वीकारो, भवसागर से पार उतारो।हम सब सेवक आज्ञाकारी, आरती सम्भवनाथ तुम्हारी॥
॥ जय जिनेन्द्र ॥