श्री नेमिनाथ भगवान की आरती
बाईसवें तीर्थंकर · अरिष्टनेमि
- चिह्न शंख
- वर्ण श्याम
- जन्मभूमि शौरीपुर
- माता-पिता शिवादेवी · समुद्रविजय
- निर्वाण गिरनार पर्वत
जय नेमिनाथ स्वामी, प्रभु जय नेमिनाथ स्वामी।तुम हो भव-दधि तारक प्रभु जी, अंतर के यामी॥
शौरीपुर में जन्म लिया प्रभु, समुद्रविजय-नंदन।शिवादेवी के राजदुलारे, जग करता वंदन॥जय नेमिनाथ स्वामी…
राजुल संग ब्याह रचाने को, जूनागढ़ आए।पशुओं की करुण पुकार सुनी, मन में दया लाए॥जय नेमिनाथ स्वामी…
सब बंधन क्षण में तोड़े प्रभु, सबको मुक्त किया।गिरि गिरनार पे जाकर स्वामी, संयम धार लिया॥जय नेमिनाथ स्वामी…
राजुल ने भी प्रभु के पथ पर, संयम अपनाया।नौ भव का वह नेह निभाकर, जग को दिखलाया॥जय नेमिनाथ स्वामी…
समवसरण में आप विराजे, खिरे मधुर वाणी।सुन भवि परम तत्त्व को पावत, सुख सम्यग्ज्ञानी॥जय नेमिनाथ स्वामी…
यक्ष-यक्षिणी चँवर ढुरावत, महिमा अब जानी।तीन छत्र सिर पर तुम सोहें, ध्यावत मुनि ध्यानी॥जय नेमिनाथ स्वामी…
आषाढ़ सुदी सातें को प्रभु ने, सब कर्म नशाए।ऊर्जयंत गिरनार शिखर से, सिद्ध-शिला पाए॥जय नेमिनाथ स्वामी…
करुणा के सागर नेमि प्रभु, तुम-सा हो जाऊँ।दीप जलाकर आरति गाऊँ, करुणा अपनाऊँ॥जय नेमिनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥