श्री नमिनाथ भगवान की आरती
इक्कीसवें तीर्थंकर
- चिह्न नीलकमल
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि मिथिला
- माता-पिता वप्रा · विजय
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय नमिनाथ स्वामी, प्रभु जय नमिनाथ स्वामी।नमन करें सब तुमको, हे शिवपुर-गामी॥
धन्य हुई मिथिला फिर से प्रभु, जन्म लिया तुमने।विजय पिता, वप्रा माता के, भाग्य जगे अपने॥ॐ जय नमिनाथ स्वामी…
आषाढ़ वदी दशमी को जन्मे, उस दिन तप धारा।नील-कमल है चिह्न तुम्हारा, स्वर्णिम उजियारा॥ॐ जय नमिनाथ स्वामी…
मगसिर सुदी ग्यारस को स्वामी, घाति-कर्म नाशे।लोक-अलोक सभी प्रभुवर के, ज्ञान-मुकुर भासे॥ॐ जय नमिनाथ स्वामी…
वैशाख वदी चौदस को प्रभु जी, शिव-पद को पाए।गिरि सम्मेदशिखर के कण-कण, पावन कहलाए॥ॐ जय नमिनाथ स्वामी…
नमि-नमि कर हम आरति गावें, तुम-सम हो जावें।मान गलाकर विनय धरें हम, शिव-पथ पर आवें॥ॐ जय नमिनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥