श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान की आरती
बीसवें तीर्थंकर
- चिह्न कछुआ
- वर्ण श्याम
- जन्मभूमि राजगृही
- माता-पिता सोमा · सुमित्र
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी, प्रभु जय मुनिसुव्रत स्वामी।भक्ति-भाव से प्रणमूँ तुमको, जय अंतरयामी॥
राजगृही में जन्म लिया प्रभु, आनंद भयो भारी।सुर-नर-मुनि गुण गाएँ तिहारे, आरति कर थारी॥ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी…
पिता तुम्हारे सुमित्र राजा, सोमा के जाया।श्यामवर्ण मूरत है तेरी, पैठण में अतिशय दरशाया॥ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी…
जो ध्यावे सुख पावे सब ही, सब संकट दूर करें।मनवांछित फल पावें सब ही, जो प्रभु-चरण धरें॥ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी…
जन्म-मरण दुख हरो प्रभु, सब पाप मिटें मेरे।ऐसी कृपा करो प्रभु हम पर, दास रहें तेरे॥ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी…
निज-गुण ज्ञान का दीपक ले, आरति करूँ थारी।सम्यग्ज्ञान दो सबको, जय त्रिभुवन के स्वामी॥ॐ जय मुनिसुव्रत स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥