श्री मल्लिनाथ भगवान की आरती
उन्नीसवें तीर्थंकर
- चिह्न कलश
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि मिथिला
- माता-पिता प्रजावती · कुम्भ
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी, प्रभु जय मल्लिनाथ स्वामी।मोह-मल्ल को जीता, तुम अंतरयामी॥
मिथिला नगरी जन्मे जिनवर, कुम्भराय-नंदन।प्रजावती माता के सुत को, सुर-नर का वंदन॥ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी…
मगसिर सुदी ग्यारस को जन्मे, उस दिन तप धारा।बाल-ब्रह्मचारी बन प्रभु ने, जग को निस्तारा॥ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी…
कलश चिह्न चरणों में सोहे, स्वर्णिम तन भाया।पौष वदी दूजे को प्रभु ने, केवल-पद पाया॥ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी…
फागुन सुदी पाँचें को स्वामी, सब बंधन टूटे।गिरि सम्मेदशिखर से प्रभु जी, भव-वन से छूटे॥ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी…
मोह-मल्ल को जिसने जीता, वह जग का राजा।दीप जलाकर आरति गावें, जय-जय जिनराजा॥ॐ जय मल्लिनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥