श्री अरनाथ भगवान की आरती
अठारहवें तीर्थंकर
- चिह्न मछली
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि हस्तिनापुर
- माता-पिता मित्रसेना · सुदर्शन
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय अरनाथ स्वामी, प्रभु जय अरनाथ स्वामी।कर्म-अरि के जेता, तुम अंतरयामी॥
हस्तिनापुर नगरी में जन्मे, पिता सुदर्शन राजा।मात मित्रसेना हरषाईं, बाजे मंगल बाजा॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
मगसिर सुदी चौदस को जन्मे, सुर उत्सव लाए।मीन चिह्न चरणों में सोहे, कंचन तन भाए॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
चक्री बनकर षट्खंड जीते, फिर सब कुछ त्यागा।मगसिर सुदी दशमी को प्रभु का, आतम-रस जागा॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
कार्तिक सुदी बारस को प्रगटा, केवलज्ञान महा।समवसरण में भविजन ने, शिव का मर्म लहा॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
चैत्र अमावस सम्मेदाचल, मोक्ष-महल पाया।आठों कर्म नशाकर प्रभु ने, निज-पद प्रगटाया॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
आरति का दीपक ले स्वामी, द्वार तिहारे आए।अरि-कर्मों से हमें छुड़ाओ, शरण तिहारी पाए॥ॐ जय अरनाथ स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥