श्री कुंथुनाथ भगवान की आरती
सत्रहवें तीर्थंकर
- चिह्न बकरा
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि हस्तिनापुर
- माता-पिता श्रीकांता · सूरसेन
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय कुंथु स्वामी, प्रभु जय कुंथु स्वामी।जीव-मात्र के रक्षक, तुम अंतरयामी॥
हस्तिनापुर में जन्मे स्वामी, सूरसेन-नंदन।श्रीकांता माँ के आँगन में, बरसे रत्न-सुमन॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
चक्री-पद, कामदेव-पद पाकर, जग का राज किया।तृण-सम सब वैभव को त्यागा, संयम धार लिया॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
चैत्र सुदी तीजे को स्वामी, केवलज्ञान हुआ।समवसरण में जिनवाणी से, जग-कल्याण हुआ॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
जन्म-तिथि पर ही प्रभुवर ने, शिव-पद को पाया।गिरि सम्मेदशिखर से जग को, मुक्ति-पथ दिखलाया॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
छोटे-छोटे जीवों पर भी, करुणा बरसाई।कुंथु नाम सार्थक कर प्रभु ने, दया-ज्योति जलाई॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
करुणा-दीप जलाकर मन में, आरति हम गावें।दया-धर्म को धारें हर पल, जीव न दुख पावें॥ॐ जय कुंथु स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥