श्री आदिनाथ भगवान की आरती
पहले तीर्थंकर · ऋषभदेव
- चिह्न बैल
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि अयोध्या
- माता-पिता मरुदेवी · नाभिराय
- निर्वाण कैलाश पर्वत
ॐ जय आदिनाथ देवा, स्वामी जय आदिनाथ देवा।तुम हो विघ्न विनाशक, पार करो खेवा॥
नाभिराय जी पिता तुम्हारे, माता मरुदेवी।रूप तुम्हारा महा मनोहर, सेव करें देवी॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
नीलांजना के देख निधन को, जिन-दीक्षा धारी।भेष दिगम्बर धारा प्रभु ने, महिमा है न्यारी॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
असि मसि कृषि वाणिज्य कला प्रभु, तुमने उपदेशे।केवलज्ञान पाय प्रभु जी तुम, भविजन उपदेशे॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
माघ वदी चौदस को प्रभु जी, भव-भव नाश हुआ।गिरि कैलाश से आदि प्रभु जी, तुम निर्वाण हुआ॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
मूर्ति तुम्हारी महा मनोहर, निरख-निरख हरषे।आरति पूजा करें तुम्हारी, निशि-दिन गुण भाषें॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
हम सब मिलकर प्रभु आपके, निशि-दिन गुण गावें।पाप-तिमिर को दूर करो प्रभु, सुख-शांति आवें॥ॐ जय आदिनाथ देवा…
॥ जय जिनेन्द्र ॥