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चौबीस तीर्थंकर की आरती

ऋषभदेव से वर्द्धमान तक

दीपक के साथ आरती खोलें

महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  1. ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  2. चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य महाराज की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  3. विमल अनंत धर्म जस उज्ज्वल, शांतिनाथ महाराज की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  4. कुंथ अरह और मल्लि मुनिसुव्रत, नमिनाथ महाराज की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  5. नेमिनाथ प्रभु पार्श्व जिनेश्वर, वर्द्धमान महाराज की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

  6. इन चौबीसों की आरती करके, आवागमन-निवार की जय।महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय॥

॥ जय जिनेन्द्र ॥