श्री शीतलनाथ भगवान की आरती
दसवें तीर्थंकर
- चिह्न कल्पवृक्ष
- वर्ण स्वर्ण
- जन्मभूमि भद्दिलपुर
- माता-पिता सुनंदा · दृढ़रथ
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय शीतल स्वामी, प्रभु जय शीतल स्वामी।भव-आताप मिटाओ, हे त्रिभुवन-नामी॥
नगरी भद्दिलपुर में जन्मे, दृढ़रथ के नंदन।मात सुनंदा हरषी मन में, सुर करते वंदन॥ॐ जय शीतल स्वामी…
माघ वदी बारस को जन्मे, उस दिन तप धारा।कल्पवृक्ष है चिह्न तुम्हारा, स्वर्ण-वरण प्यारा॥ॐ जय शीतल स्वामी…
चंदन से भी शीतल वाणी, जग-संताप हरे।जो जन सुनकर मन में धारे, भवसागर उतरे॥ॐ जय शीतल स्वामी…
क्रोध-मान की आग बुझाओ, शीतल कर दो मन।समता-रस में डूबा रहूँ मैं, पावन हो जीवन॥ॐ जय शीतल स्वामी…
गिरि सम्मेदशिखर से स्वामी, मोक्ष-धाम पाया।दसवें तीर्थंकर जिनवर को, सुर-नर ने ध्याया॥ॐ जय शीतल स्वामी…
शीतल जल-सी शांति मिले प्रभु, आरति हम गावें।तुम-सा शीतल आतम पाकर, शिवपुर को जावें॥ॐ जय शीतल स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥