श्री पुष्पदंत भगवान की आरती
नौवें तीर्थंकर · सुविधिनाथ
- चिह्न मगर
- वर्ण श्वेत
- जन्मभूमि काकंदी
- माता-पिता जयरामा · सुग्रीव
- निर्वाण सम्मेदशिखर
ॐ जय पुष्पदंत स्वामी, प्रभु जय पुष्पदंत स्वामी।सुविधिनाथ जिनेश्वर, तुम अंतरयामी॥
नगरी काकंदी में जन्मे, सुर-नर हरषाए।पिता सुग्रीव, मात जयरामा, मंगल-गुण गाए॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
मगसिर सुदी एकम को जन्मे, उस दिन तप धारा।श्वेत-वरण तन शोभित प्रभु का, मगर-चिह्न प्यारा॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
कार्तिक सुदी दूज को प्रगटा, केवल-रवि न्यारा।दिव्यध्वनि से भवि जीवों का, मेटा अँधियारा॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
भादों सुदी आठें को प्रभु ने, आठों कर्म हने।गिरि सम्मेदशिखर से स्वामी, सिद्ध महान बने॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
जो जन तुमको मन से ध्यावे, सुख-सम्पति पावे।पुष्प सरीखा जीवन महके, दुख सब मिट जावे॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
जगमग दीप जलाकर स्वामी, चरणों में आए।भव-भव के बंधन कट जाएँ, यह ही मन भाए॥ॐ जय पुष्पदंत स्वामी…
॥ जय जिनेन्द्र ॥